:
Breaking News

नीतीश सरकार का पहला बजट: रोजगार, कल्याण और विकास के बीच संतुलन की परीक्षा

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटना:
बिहार की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए 3 फरवरी का दिन खास होने जा रहा है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार के गठन के बाद पहली बार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश किया जाएगा। वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सदन में बजट प्रस्तुत करेंगे, जिस पर न केवल राजनीतिक दलों बल्कि आम जनता, कर्मचारी वर्ग और उद्योग जगत की निगाहें टिकी हैं।
यह बजट ऐसे समय आ रहा है जब सरकार चुनावी वादों को जमीन पर उतारने के दबाव में है। एक करोड़ नौकरी और रोजगार का लक्ष्य, महिला रोजगार योजनाएं, सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि और सात निश्चय-3 जैसी घोषणाओं ने इस बजट को बेहद अहम बना दिया है।
बजट का बढ़ता कद, बढ़ती जिम्मेदारियां
पिछले दो दशकों में बिहार के बजट आकार में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में जहां राज्य का बजट महज 23,885 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 3.17 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। आमतौर पर हर साल 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की जाती रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार बजट का आकार साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रो. प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार की प्रति व्यक्ति आय में भले सुधार हुआ हो, लेकिन यह अब भी विकसित राज्यों से काफी पीछे है। गरीबी, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश की जरूरत है। यही वजह है कि सरकार को इस बार विकासोन्मुख और खर्चीला बजट पेश करना पड़ेगा।
रोजगार सबसे बड़ा एजेंडा
सरकार का एक करोड़ नौकरी और रोजगार का वादा इस बजट की दिशा तय करेगा। शिक्षा विभाग में सबसे अधिक नियुक्तियां प्रस्तावित हैं, जिससे उसका बजट और बढ़ना तय माना जा रहा है। इसके साथ ही वेतन और पेंशन पर खर्च सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बीते कुछ वर्षों में सैलरी मद में खर्च दोगुने से भी ज्यादा हो चुका है, जिसका असर आगामी बजट में साफ दिखेगा।
महिला मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत महिलाओं को दो लाख रुपये तक की सहायता देने की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। इसके लिए भी बड़ी राशि का प्रावधान आवश्यक होगा।
किन विभागों पर रहेगा फोकस
सात निश्चय-3 के तहत औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजना है। ऐसे में उद्योग, स्वास्थ्य, पथ निर्माण, जल संसाधन और गृह विभाग के बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के चलते ऊर्जा विभाग पर भी अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन में वृद्धि के बाद समाज कल्याण विभाग के बजट का दायरा बढ़ना तय है। वहीं मनरेगा में केंद्र के हिस्से में बदलाव के कारण ग्रामीण विकास विभाग पर बिहार सरकार की हिस्सेदारी बढ़ेगी।
राजस्व जुटाना बड़ी चुनौती
आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार बिहार अपने कुल खर्च का लगभग 27 प्रतिशत ही आंतरिक राजस्व से जुटा पाता है। शेष राशि के लिए राज्य को केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान और हिस्सेदारी पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि सरकार का दावा है कि टैक्स वसूली में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन बढ़ते खर्च के मुकाबले यह अब भी नाकाफी है।
उद्योग जगत की निगाहें बजट पर
बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने सरकार को उद्योग विभाग का बजट बढ़ाने का सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि यदि उद्योग विभाग को कुल बजट का पर्याप्त हिस्सा मिलता है, तो औद्योगीकरण अपने आप रफ्तार पकड़ेगा। निवेशकों की रुचि बढ़ रही है, लेकिन अब नीतियों को जमीन पर उतारना जरूरी है।
सरकार का भरोसा
वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि सरकार अपने सभी वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने भी इस बजट को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा है कि यह बिहार को विकास की नई दिशा देगा।
निष्कर्ष
यह बजट केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि यह बताएगा कि नीतीश सरकार अपने वादों को किस प्राथमिकता के साथ लागू करने जा रही है। रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के बीच संतुलन साधना इस बजट की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *